मिलिट्री एक्सप्लोसिव्स एंड प्रोपेलेंट्स सेफ्टी एंड कंप्लायंस (सैन्य विस्फोटक और प्रणोदक सुरक्षा और अनुपालन) पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
‘हर काम देश के नाम’
मिलिट्री एक्सप्लोसिव्स एंड प्रोपेलेंट्स सेफ्टी एंड कंप्लायंस (सैन्य विस्फोटक और प्रणोदक सुरक्षा और अनुपालन) पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
नई दिल्ली
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के तहत, नई दिल्ली स्थित गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (Directorate General of Quality Assurance) के अंतर्गत आने वाले पुणे स्थित गुणवत्ता आश्वासन नियंत्रक कार्यालय (सैन्य विस्फोटक) ने पुणे में “सैन्य विस्फोटक और प्रणोदक: सुरक्षा और अनुपालन” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

इस संगोष्ठी में रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव श्री संजीव कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशक श्री एन. मनोहरन ने स्वागत भाषण दिया।
इस संगोष्ठी में जाने-माने नीति-निर्माता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, रक्षा उत्पादन क्षेत्र के प्रमुख, वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ और शिक्षाविद एक साथ आए। विशिष्ट प्रतिनिधियों में संयुक्त सचिव (लैंड सिस्टम्स) डॉ. गरिमा भगत, संयुक्त सचिव (DIP) श्री प्रकाश राजपुरोहित, म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक; विस्फोटक उद्योगों के प्रतिनिधि; रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिक; और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे।
इस संगोष्ठी ने सैन्य विस्फोटक और प्रणोदक क्षेत्र में सुरक्षा और अनुपालन को मजबूत करने के लिए नीतियों और संस्थागत तंत्रों पर विचार-विमर्श करने हेतु एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। चर्चाओं का मुख्य केंद्र प्रक्रिया सुरक्षा को बढ़ाना, विस्फोटक निर्माण सुविधाओं में दुर्घटनाओं को कम करना, स्वचालन (ऑटोमेशन) को बढ़ावा देना, उन्नत सुरक्षा तकनीकों को अपनाना और सरकारी एजेंसियों, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग, अनुसंधान संगठनों और शिक्षा जगत के बीच समन्वय को मजबूत करना था।
सैन्य विस्फोटकों और प्रणोदकों के पूरे जीवन-चक्र—डिजाइन और विकास से लेकर निर्माण, परीक्षण, परिवहन, भंडारण, रखरखाव और परिचालन उपयोग तक—को शामिल करते हुए एक व्यापक सुरक्षा ढांचा स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस संगोष्ठी ने एक नीतिगत रोडमैप तैयार करने और सरकार, रक्षा प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक और निजी उद्योग, अनुसंधान संगठनों तथा शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) के गठन पर विचार-विमर्श करने में योगदान दिया। प्रस्तावित कार्य समूह का उद्देश्य समन्वित कार्रवाई, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (best practices) को साझा करने, सामान्य सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित करने और दुर्घटना-रोकथाम उपायों में निरंतर सुधार को सुविधाजनक बनाना था।
इस संगोष्ठी का अंतिम उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करना और भारतीय सशस्त्र बलों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण हथियार और गोला-बारूद की उपलब्धता का समर्थन करना था, साथ ही घरेलू रक्षा उद्योग में नवाचार, तकनीकी प्रगति और जिम्मेदार विकास को सक्षम बनाना था। पुणे में क्वालिटी एश्योरेंस (मिलिट्री एक्सप्लोसिव्स) निदेशालय के कंट्रोलर और नेशनल सेमिनार के आयोजक डॉ. टी. के. वरदराजन ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।
इस सेमिनार में मिलिट्री एक्सप्लोसिव्स और प्रोपेलेंट्स सेक्टर में सुरक्षा, नियमों का पालन, इनोवेशन और सहयोग की मज़बूत संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दिखाई दी।
