बड़गाम दिवस पर मेजर सोमनाथ शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि, 4 कुमाऊँ पूर्व सैनिक संगठन ने वीरपुर में धूमधाम से मनाया समारोह*

‘हर काम देश के नाम’

 

*बड़गाम दिवस पर मेजर सोमनाथ शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि, 4 कुमाऊँ पूर्व सैनिक संगठन ने वीरपुर में धूमधाम से मनाया समारोह*

 

*देहरादून (उत्तराखंड)

 

भारतीय सेना के प्रथम परमवीर चक्र विजेता एवं 4 कुमाऊँ के वीर सपूत शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा की पुण्य स्मृति में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को बड़गाम दिवस श्रद्धा, सम्मान और गौरव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 4 कुमाऊँ — फाइटिंग फोर्थ पूर्व सैनिक संगठन के सदस्यों एवं जवानों ने वीरपुर स्थित सैनिक संस्थान में एकत्रित होकर अपने महान वीर नायक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

कार्यक्रम में डिप्टी कमांडर कर्नल गौरव सिंह, शौर्य चक्र ,सेना मेडल (SC, SM) सहित उपस्थित सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने मेजर सोमनाथ शर्मा की प्रतिमा एवं स्मृति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सभी ने देश की रक्षा के लिए उनके अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और सर्वोच्च बलिदान को याद किया।

 

मेजर सोमनाथ शर्मा ने 3 नवंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में दुश्मन की भारी संख्या के सामने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया था। उनकी कमान में 4 कुमाऊँ की टुकड़ी ने दुश्मन के हमले का डटकर मुकाबला किया और श्रीनगर हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण समय उपलब्ध कराया। इसी युद्धभूमि में मेजर शर्मा ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके असाधारण शौर्य और वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के प्रथम परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

 

इस अवसर पर आयोजित बड़े खाने में 4 कुमाऊँ परिवार के पूर्व सैनिकों, जवानों और उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में पुराने साथियों का मिलन हुआ और सभी ने सैन्य जीवन से जुड़ी यादें साझा कीं। समारोह ने एक बार फिर सैनिकों के बीच आपसी भाईचारे, एकता, अनुशासन और पलटन के प्रति अटूट समर्पण की भावना को मजबूत किया।

 

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मेजर सोमनाथ शर्मा का बलिदान केवल 4 कुमाऊँ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश देता रहेगा।

 

समारोह का मुख्य उद्देश्य वीर शहीदों की स्मृतियों को जीवंत रखना, गौरवशाली सैन्य परंपराओं को आगे बढ़ाना और नई पीढ़ी को देशभक्ति एवं बलिदान की भावना से परिचित कराना रहा।

 

अंत में सभी उपस्थित सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने एक स्वर में अपने गौरवशाली सैन्य आदर्शों को दोहराया—

 

“4 कुमाऊँ — नाम, नमक, निशान!”

“पराक्रमो विजयते!”

कालिका माता की जय! बजरंगबली की जय! जय हिंद!

 

 

 

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