यूकॉस्ट के विज्ञान सम्मेलन में गढ़वाल विश्विद्यालय के डॉ. ओम प्रकाश तिवारी को यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से नवाजा गया* 

*यूकॉस्ट के विज्ञान सम्मेलन में गढ़वाल विश्विद्यालय के डॉ. ओम प्रकाश तिवारी को यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से नवाजा गया*

 

श्रीनगर (गढ़वाल )

हेमती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के वनस्पति विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग में कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश तिवारी को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा आयोजित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन में प्रतिष्ठित ‘यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

 

25 एवं 26 अक्टूबर, 2026 को आयोजित इस सम्मेलन में डॉ. तिवारी को वन पारिस्थितिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। सम्मेलन के समापन समारोह में उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री अनिल रतूड़ी और उत्तराखंड सरकार की पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया। अपनी शोध प्रस्तुति में डॉ. तिवारी ने हिमालयी वनों में अधःस्तरीय वनस्पतियों की बदलती परिस्थितियों तथा उनकी उत्पादकता एवं कार्बन भंडारण क्षमता के आकलन के लिए विकसित विशेष मॉडलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र की वास्तविक स्थिति को समझने में इन मॉडलों की उपयोगिता भी बताई।

 

डॉ. तिवारी के अनुसार, हिमालयी वनों में पाई जाने वाली झाड़ी प्रजातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनका जैवभार आकलन कार्बन भंडारण, जलवायु परिवर्तन, पोषक तत्त्वों के चक्रण, मृदा संरक्षण और जैव विविधता के अध्ययन के लिए आवश्यक है। जैवभार के आकलन से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि झाड़ी प्रजातियाँ अपने ऊतकों में कितना कार्बन संचित करती हैं तथा पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना और कार्यप्रणाली में उनका कितना योगदान है।

 

डॉ. तिवारी ने अपना शोधकार्य गढ़वाल विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के पूर्व कुलपति प्रो. सी. एम. शर्मा के निर्देशन में पूर्ण किया। उनका प्रमुख शोध क्षेत्र हिमालयी शीतोष्ण वनों की पारिस्थितिकी है। अब तक उनके 25 से अधिक शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वे मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर विकासखंड के निवासी हैं और वर्तमान में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है।

 

डॉ. तिवारी ने इस सम्मान का श्रेय विश्वविद्यालय के दूरदर्शी नेतृत्व से मिले मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन तथा संस्थान के अधिकारियों, अपने शोध निर्देशक और शिक्षकों के सहयोग को दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. पी. सिंह, कुलसचिव प्रो. वाई. पी. रैवानी, बिरला परिसर के निदेशक प्रो. एच. बी. एस. चौहान, अधिष्ठिता छात्र कल्याण प्रो. ओ. पी. गुसाईं, अधिष्ठिता भर्ती एवं पदोन्नति प्रो. एम. एस. पंवार, जीव विज्ञान संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. मंजू प्रकाश गुसाईं तथा वनस्पति विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एन. गोविंदन सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने वरिष्ठ संकाय सदस्यों एवं अन्य सहयोगियों से मिले निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के लिए भी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की।

 

विश्वविद्यालय के अधिकारियों, संकाय सदस्यों, सहकर्मियों ने डॉ. तिवारी को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी शोध कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

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