कृषि स्टार्टअप हितधारकों की बैठक की मेजबानी करेगा गढ़वाल विश्वविद्यालय
कृषि स्टार्टअप हितधारकों की बैठक की मेजबानी करेगा गढ़वाल विश्वविद्यालय
श्रीनगर गढ़वाल
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का कृषि एवं सम्बद्ध विज्ञान का ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग, हैदराबाद स्थित मैनेज–सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एग्रीप्रेन्योरशिप (मैनेज–सीआईए) के सहयोग से 23 सितंबर 2026 को ‘एग्री-स्टार्टअप स्टेकहोल्डर्स कनेक्ट’ कार्यक्रम आयोजित करेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि स्टार्टअप इकोसिस्टम में मौजूद कमियों को दूर करना तथा विभिन्न हितधारकों के बीच साझेदारी और सहयोग के अवसर पैदा करना है।
कार्यक्रम के माध्यम से कृषि क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, निवेशकों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। इसमें कृषि विकास प्रशासकों, नीति निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, इनक्यूबेशन एवं नवाचार केंद्रों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि व्यवसाय फर्मों, बैंकों, वेंचर कैपिटलिस्ट, स्टार्टअप सलाहकारों, छात्रों, ग्रामीण युवाओं और कृषि स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े सरकारी संगठनों सहित करीब 300 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालय का इनक्यूबेशन सेंटर (आईडीआईसी) तथा स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के विभिन्न विभाग उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
कार्यक्रम में इंटरैक्टिव कार्यशालाएं, नेटवर्किंग, ज्ञान साझाकरण सत्र, चर्चाएं तथा उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी और नवीन व्यावसायिक मॉडलों को प्रदर्शित करने वाली उत्पाद प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. आर.एस. नेगी, डीन कृषि एवं सम्बद्ध विज्ञान, के अनुसार यह पहल अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और निवेशकों के बीच संबंध स्थापित करने में सहायक होगी तथा कृषि व्यवसाय क्षेत्र में सतत विकास को प्रोत्साहित करेगी।
कार्यक्रम का आयोजन गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, श्री सुभाष चन्द्र नेगी, उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) एवं अध्यक्ष केंद्रीय प्रशिक्षण केंद्र, सशस्त्र सीमा बल, श्रीनगर गढ़वाल, तथा मैनेज, हैदराबाद के निदेशक डॉ. सरपन राज एवं स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के मार्गदर्शन में किया जाएगा।
