एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत युवा संगम के वैलिडेटरी सेशन व समापन समारोह का भव्य आयोजन
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत युवा संगम के वैलिडेटरी सेशन व समापन समारोह का भव्य आयोजन
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों को प्रदान किए प्रमाण पत्र
श्रीनगर गढ़वाल / देहरादून:
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान के तहत आयोजित ‘युवा संगम’ कार्यक्रम का भव्य वैलिडेटरी सेशन (समापन समारोह) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस गरिमामय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री (भारत सरकार) डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल से आए युवा डेलिगेट्स, जिन्होंने उत्तराखंड के विभिन्न सांस्कृतिक, भौगोलिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों का सघन भ्रमण किया, उन्हें मुख्य अतिथि डॉ. निशंक के कर-कमलों द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
उत्तराखंड में इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का आयोजन नोडल संस्थान हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा किया गया, जबकि पश्चिम बंगाल की ओर से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़कपुर नोडल एजेंसी के रूप में शामिल रही। गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह के निरंतर मार्गदर्शन एवं कुशल मॉनिटरिंग में यह पूरा आयोजन सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा।
डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का सारगर्भित संबोधन
अपने अत्यंत प्रेरणादायक और मार्गदर्शक संबोधन में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा:
“एक भारत श्रेष्ठ भारत केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की अखंडता, विविधता और सांस्कृतिक प्रगाढ़ता को मजबूत करने का एक अनुपम महायज्ञ है। पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड की यह सांस्कृतिक साझेदारी देश की ‘विविधता में एकता’ का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है। हजारों आवेदनों की लंबी प्रक्रिया के बाद चयनित होकर आए यह युवा डेलिगेट्स अत्यंत भाग्यशाली हैं। आज पूरे देश की निगाहें आप पर हैं, क्योंकि आप ही आने वाले समय में ‘विकसित भारत’ के मुख्य संवाहक बनेंगे।”
डॉ. निशंक ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए उत्तराखंड की अद्वितीय पहचान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता, अध्यात्म, देव संस्कृति और ज्ञान परंपरा के कारण पूरे विश्व में अनोखा स्थान रखता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस यात्रा से अर्जित अनुभवों को अपने जीवन में समाहित करें और राष्ट्रीय एकता के स्थायी दूत बने।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों एवं वक्ताओं द्वारा डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के केंद्रीय शिक्षा मंत्री कार्यकाल के ऐतिहासिक योगदान को विशेष रूप से याद करते हुए उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में रेखांकित किया गया कि भारत की युगांतरकारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की रूपरेखा तय करने और इसे देश भर में आकार देने का ऐतिहासिक कार्य डॉ. निशंक के नेतृत्व में ही संपन्न हुआ था। इसके साथ ही, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को शिक्षा, कला और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से जमीनी स्तर पर उतारने की जो विस्तृत रूपरेखा और विज़न उन्होंने तैयार किया था, उसी का प्रतिफल आज ‘युवा संगम’ जैसे बहुआयामी आयोजनों के रूप में दिखाई दे रहा है। विश्वविद्यालय परिवार ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को दूरदर्शी व युगीन दिशा देने के लिए डॉ. निशंक का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन किया और सभा को संबोधित करते हुए कहा:
“युवा संगम जैसे अंतर-राज्यीय कार्यक्रम देश के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा, खान-पान और परंपराओं को निकटता से समझने का अद्वितीय सुअवसर प्रदान करते हैं। पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड के युवाओं के बीच बना यह आत्मीय संबंध दोनों राज्यों के सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा।”
इससे पूर्व, कार्यक्रम का शुभारंभ नोडल अधिकारी तथा अर्थ साइंस संकाय के डीन प्रो. महावीर सिंह नेगी के स्वागत संबोधन से हुआ। प्रो. नेगी ने मुख्य अतिथि डॉ. निशंक को पुष्पगुच्छ (बुके), शॉल एवं स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उनका भावपूर्ण अभिनंदन किया। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों ने भी अतिथियों का बुके देकर आत्मीय स्वागत किया।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण देते हुए तथा पूरी रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. महावीर सिंह नेगी ने कहा:
“युवा संगम के इस सफल आयोजन के माध्यम से पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, साहसिक पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से जानने-समझने का अवसर मिला है। यह अंतर-राज्यीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक भ्रमण युवाओं के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और उनके सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होगा।”
आयोजन टीम, संचालन एवं आभार प्रदर्शन
इस पूरे कार्यक्रम को सुचारू और सफल बनाने में गढ़वाल विश्वविद्यालय की फैकल्टी एवं टीम मेंबर्स डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. हिमशिखा गोस्वामी और डॉ. सर्वेश उनियाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संपूर्ण संयोजन डॉ. सर्वेश उनियाल द्वारा किया गया। वहीं पश्चिम बंगाल की नोडल एजेंसी आईआईटी खड़कपुर के 5 सम्मानित फैकल्टी मेंबर्स भी पूरे भ्रमण के दौरान डेलिगेट्स के साथ निरंतर उपस्थित रहे।
समारोह का संचालन डॉ. हिमशिखा गोस्वामी ने अत्यंत गरिमामय और प्रभावी ढंग से किया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. नरेंद्र कुमार ने मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद, विश्वविद्यालय प्रशासन, आईआईटी खड़कपुर की टीम तथा पश्चिम बंगाल से आए सभी डेलिगेट्स का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
प्रोफेसर महाबीर सिंह नेगी
नोडल आधिकारी युवा संगम
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय,
