राष्ट पिता श्री गुरु गोविन्द सिंह जी के पुत्रों के बलिदान को स्मरण किया

सिर देकर मिला सिख धर्म मात्र एक धर्म नहीं बल्कि त्याग और बलिदान का जीता जागता उदाहरण है बस जरूरत है आज की युवा पीढ़ी को सरबंस दानी *गुरु गोविन्द सिंह जी* के एतिहास को जानने की
देहरादून
देहरादून के राजभवन में पहली बार वीर साहबजादो का शहीदी पर्व पूर्ण श्रद्धा एंव विस्वास के साथ मनाया गया कार्यक्रम को एतिहासिक एंव धार्मिक रूप देने के लिए कई विद्वानो को विशेष रूप से जैसे संकृति विवि के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री पंजाबी इतिहासकार बलजीत सिंह जो कि पंजाब से आए थे बुलाया गया
उत्तराखंड के कई अनुभवी इतिहासकारों ने सिख धर्म के बलिदानों की व्याख्या भी की
उत्तराखण्ड के दूसरे सिख *महामहिम राज्यपाल गुरमीत सिंह जी* ने सिख एतिहास के बलिदानों को बारीकियों से समझाते हुए वीर साहबजादो के जीवन के बारे में बताने की कोशिश की
राष्टीय अल्पसंख्यक आयोग के सलाहकार सदस्य गुरदीप सिंह सहोता जी ने कहा कि केंद्र सरकार की और से *वीर बाल दिवस* को राष्ट्रीय दिवस घोषित कर घर घर तक दुनिया के सर्वोच्च बलिदान के इतिहास को पहुचाया
इस एतिहासिक फेसले के लिए पूरा राष्ट एंव विशेष कर सिख समाज यशस्वी प्रधान मंत्री मोदी जी का सदेव ऋणी रहेगा